कुछ सिखने लायक बाते


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अपेक्षा ही दुःख का कारण !

किसी दिन एक मटका और गुलदस्ता साथ में खरीदा हों और घर में लाते ही ५० रूपये का मटका अगर फूट जाएं तो हमें इस बात का दुःख होता हैं। क्योंकि मटका इतनी जल्दी फूट जायेगा ऐसी हमें कल्पना भी नहीं थीं। परंतु गुलदस्ते के फूल जो २०० रूपये के हैं, वो शाम तक मुर्झा जाएं, तो भी हम दुःखी नहीं होते। क्योंकि ऐसा होने वाला ही हैं, यह हमें पता ही था।

मटके की इतनी जल्दी फूटने की हमें अपेक्षा ही नहीं थीं, तो फूटने पर दुःख का कारण बना। परंतु​ फूलों से अपेक्षा नहीं थीं, इसलिए​ वे दुःख का कारण नहीं बनें। इसका मतलब साफ़ हैं कि जिसके लिए जितनी अपेक्षा ज़्यादा, उसकी तरफ़ से उतना दुःख ज़्यादा और जिसके लिए जितनी अपेक्षा कम, उसके लिए उतना ही दुःख भी कम।

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जीवन क्या है?

What is Life?

 

जब मनुष्य जन्म लेता है तो उसके पास सांसे तो होती हैं पर कोई नाम नहीं होता और जब मनुष्य की मृत्यु होती है तो उसके पास नाम तो होता है पर सांसे नहीं होती। इसी सांसों और नाम के बीच की यात्रा को कहते हैं – जीवन ।

 

जीवन में विश्वास महत्वपूर्ण है। इन १० बातों में विश्वास रखते हैं तो जीवन बहेतर होता है।

 

?जीवन का मतलब:

{1} हर कोई खुशहाल जीवन जीना चाहेगा, लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इसका मतलब क्या होगा या इसे कैसे पूरा किया जाएगा।

?नकारात्मकता से छुटकारा:

{२} हमारी भावनाएँ और मनोवृत्तियाँ प्रभावित करती हैं कि हम कैसा महसूस करते हैं। प्रशिक्षण के साथ, हम खुद को नकारात्मक से छुटकारा दिला सकते हैं और उन लोगों को विकसित कर सकते हैं जो स्वस्थ और अधिक सकारात्मक हैं। ऐसा करने से हमारा जीवन खुशहाल और अधिक संपन्न होगा।

 

?आत्म नियंत्रण:

{३} क्रोध, भय, लालच और मोह जैसी भावनाओं को दूर करने से हमें मानसिक शांति और आत्म-नियंत्रण खोना पड़ता है। प्रशिक्षण के साथ, हम अपने आप को उनके नियंत्रण में होने से मुक्त कर सकते हैं।

 

?शान्ति :

{४} क्रोध या लालच से मजबूर होकर कार्य करना हमारे लिए समस्याएँ पैदा करता है और दुःख का कारण बनता है। प्रशिक्षण के साथ, हम शांत होना सीख सकते हैं, स्पष्ट रूप से सोच सकते हैं और बुद्धिमानी से काम कर सकते हैं।

 

?सकारात्मक भावनाएं :

{५} सकारात्मक भावनाएं जैसे प्यार, करुणा, धैर्य और समझ हमें शांत, खुले और स्पष्ट रहने में मदद करती हैं, और हमें अधिक खुशी लाती हैं। प्रशिक्षण के साथ, हम उन्हें विकसित करना सीख सकते हैं।

 

?नि:स्वार्थ व्यवहार :

{६} आत्मचिंतन, स्वार्थी व्यवहार और विचार हमें दूसरों से दूर करते हैं और हमें दुखी करते हैं। प्रशिक्षण के साथ, हम उन्हें दूर कर सकते हैं।

 

?मददगार होना :

{७} यह महसूस करते हुए कि हम सभी आपस में जुड़े हुए हैं और यह कि हमारा अस्तित्व एक दूसरे पर निर्भर है, हमारे दिल और दिमाग को खोलता है, हमें दूसरों के लिए चिंता विकसित करने में मदद करता है, और हमें अधिक खुशी देता है।

 

?भ्रम को दूर करना :

{८} जो हम अपने आप में और दूसरों में महसूस करते हैं उनमें से अधिकांश भ्रम के आधार पर कल्पना के अनुमान हैं। जब हम मानते हैं कि हमारे अनुमान वास्तविकता के अनुरूप हैं, तो हम अपने और दूसरों के लिए समस्याएं पैदा करते हैं।

 

?वास्तविकता :

{९} सही समझ के साथ, हम खुद को भ्रम से मुक्त कर सकते हैं और वास्तविकता देख सकते हैं। यह हमें जीवन में जो कुछ भी होता है, उससे शांति और समझदारी से निपटने में सक्षम बनाता है।

 

?बेहतर इंसान :

{१०} बेहतर इंसान बनने के लिए खुद पर काम करना जीवन भर की चुनौती है, लेकिन सबसे सार्थक चीज हम अपने जीवन के साथ कर सकते हैं।

 

मनुष्य जीवन अनमोल है। बेहतर इंसान बनने के लिए उच्च आदर्श होना जरूरी है। मनुष्य जीवन में प्रथम आदर्श है- सदाचार। दूसरा आदर्श है-सम्यक दृष्टि और चित्त की एकाग्रता। तीसरा आदर्श है – यथाभूत ज्ञान ।

संक्षिप्त में – शील, समाधि और प्रज्ञा का मार्ग बेहतर इंसान बनने के लिए आदर्श है।

 

न किसी के अभाव में जियो,

न किसी के प्रभाव में जियो।

यह जिंदगी है आपकी, बेहतर जीवन जियो।

 

नमो बुद्धाय???

 

हसीं  वाला ठहाका 

 

देश में सरकारी अस्पताल का

 

मतलब है जान से हाथ धोना

 

और प्राइवेट अस्पताल का

 

मतलब है जायदाद से हाथ धोना

 

इसलिए हर घंटे हाथ धोते रहें

 

ताकि दोनों जगह ना जाना पडे ?

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